May 13, 2021

Aone Punjabi

Nidar, Nipakh, Nawi Soch

संगरुर के गांव कोहरियाँ में हस्पताल की एमरजेंसी सहूलतें बंद करने को लेकर अकाली दल ने कैप्टन सरकार ख़िलाफ़ किया धरना प्रदर्शन किया..

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संगरुर के गांव कोहरियाँ में हस्पताल की एमजेंसी सहूलतें बंद करने को लेकर अकाली दल ने कैप्टन सरकार ख़िलाफ़ धरना प्रदर्शन किया उन्हों ने चतावनीं दी कि अगर एमरजेंसी चालू ना कि तों जिले भर की सभी जरहेबन्दीओं की साथ लेकर संघर्ष तीखा के किया जाएगा लेक़िन प्रदर्शन में सोशल डिस्टेंस ओर कोविड 19 की पालना करते सिर्फ 5 वियक्तिओं ने ही रोष धरना किया ।

कैप्टन सरकार ने सत्ता में आने से पहिले सूबे के लोगों को कई सहूलतें देने का वादा किया गया था जिनमें सेहत सहूलत के साथ साथ एजुकेशन ओर रोज़गार था लेक़िन सूबे में तीनों सहूलतों को लेकर लोग सड़कों पर हैं कि कैप्टन सरकार ने सहूलतें देनें की बजाए पहिले वाली भी बंद की जा रहीं हैं ऐसे ही दिड़बा के गांव कोहरियाँ में 58 साल पुराने चलते आ रहे हसप्ताल की एमरजेंसी बंद कर दी है जिसकों लेकर आज सिरोमनि अकाली दल बादल के आगूओं ने हस्पताल आगे बैठकर शांतमाई रोष धरना प्रदर्शन किया उन्हों ने कोविड 19 की पालना करते सिर्फ़ पांच वियक्ति ही धरने पर बैठें उन्हों ने कैप्टन सरकार को निशाने पर लेतें कहा कि सरकार ने लोगों की सहूलतें देने की बजाए धीरे धीरे सभी बंद कर रही है उन्हों ने बतेया कि ज़िला भर में दूसरा ऐसा जसप्ताल था जो 100 गांवों से अधिक।लोगों को एमरजेंसी सहूलतें प्रदान करता था अब इस हसप्तन कि एमरजेंसी सहूलतें बंद कर लोगो के साथ बेइंसाफी की है अगुओं ने बसरकार को चतावनीं दी कि अगर बंद की एमरजेंसी चालू ना कि तो जिले भर की सभी जरहेबन्दीओं की साथ लेकर संघर्ष तीखा के किया जाएगा।

उधर गांव वासियों ने भी सरकार से रोष ज़ाहिर किया उन्हों ने कहा कि इस हस्पताल की एमरजेंसी सों गांवो को एमजेंसी सहूलतें प्रदान करता था लेकिन अब एमरजेंसी बंद होने के चलते लोगो को भारी मुश्किलो का सहमना करना पड़ता है और दूसरे हस्पताल दूरी पर हैं जहाँ पर कटे जातें कई लोगों किंजन भी जा चुकी है।कोहरियाँ हस्पताल में लोगो की एमरजेंसी सहूलतें बंद होने के साथ साथ नशें के आदि भी परेशान हैं उनका कहिना है कि पहिले हमे 21 दिनों की दवाई।मिल जाती थी लेकिन अब 4 गोलियां पीस कर हमें रोज़ाना खिलाई जाती है लेकिन अब वो भिनन्हि मिल रही परेशान लोगो ने इसका खमियाज़ा कैप्टन सरकार को 2022 की चुनाव में भुगतना पड़ेगा।

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