May 9, 2021

Aone Punjabi

Nidar, Nipakh, Nawi Soch

44 एकड़ पंचायती जमीन की बोली पांचवी बार हुई रद्द,गांव वासियों ने B.D.O पर लगाए सरपंच के साथ मिलीभगत कर परेशान करने के आरोप..

1 min read

फाजिल्का के गांव अभुन की 44 एकड़ पंचायती जमीन की बोली पांचवी बार हुई रद्द गांव वासियों ने बी डी ओ पर लगाए सरपंच के साथ मिलीभगत कर परेशान करने के आरोप ।

जिला फाजिल्का के गांव अभुन की 44 एकड़ पंचायती जमीन का मामला पिछले लंबे समय से सुलझता नजर नहीं आ रहा जिसकी जिला पंचायत अफसर द्वारा रखी गई बोली आज पांचवीं बार रद्द कर दी गई है जिसको लेकर गांव वासियों में रोष पाया जा रहा है की जिला पंचायत अफसर  द्वारा उन्हें राजनीतिक रंजिश के चलते मौजूदा सरपंच के साथ मिलीभगत कर हर बार परेशान किया जाता है ।

जहां गांव वासियों ने आरोप लगाए हैं कि गांव की 44 एकड़ पंचायती जमीन जो कि मौजूदा सरपंच द्वारा गुप्त तरीके से बोली करवाने के बिना अपने लोगों को 24 लाख वाली जमीन 11 लाख में ठेके पर दे दी गई है जिसको पंचायती विभाग द्वारा कैंसिल कर नई बोली करवाने के लिए उन्हें हर बार बोली के लिए बुलाया जाता है लेकिन आज पांचवीं बार भी फोर्स ना होने का बहाना लगाकर बोली को रद्द कर दिया गया है उन्होंने कहा कि आज गांव के 45 व्यक्तियों द्वारा बोली दी जानी थी जो के अपने साथ सिक्योरिटी  लेकर आए थे जिन्हे बहाना बनाकर आज फिर खाली मोड़ दिया गया  उन्होंने  बी डी ओ पर आरोप लगाते हुए कहा कि  बी डी ओ द्वारा गांव के सरपंच शेरबाज सिंह के साथ मिलीभगत कर जानबूझकर उन्हें हर बार खराब किया जाता है उन्होंने मांग करते हुए कहा कि उनके गांव की पंचायत की जमीन की बोली सही तरीके से करवाई जाए ।

वह इस मौके  बी डी ओ परमजीत सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि पहले हुई बोली को रद्द करवा कर नई बोली करवाई जानी थी लेकिन फोर्स ना मिलने के कारण उन्हें लड़ाई झगड़ा होने का खतरा था इसलिए बोली को दोनों पक्षों की सहमति से रद्द किया गया है जिसे जल्द ही डी डी पी ओ की मौजूदगी में करवाया जाएगा । 

वहीं अगर देखा जाए तो धान की फसल मंडियों में जल्द ही आने भी शुरू हो जाएगी लेकिन पंचायती विभाग द्वारा जमीन की बोली अभी तक नहीं करवाई गई जिससे किसानों और गांव निवासियों का तो नुकसान हुआ है दूसरी तरफ सरकार को भी लाखों रुपए का नुकसान हुआ है और इस जमीन उगाऐ जाने वाले देश के अनाज की पैदावार का भी नुकसान हुआ है तो ऐसे में सरकार को चाहिए कि जमीन की बोली ना करवाकर सरकार के लाखों रूपये के रेवेन्यू का नुक्सान करने वाले लापरवाह अधिकारी पर बनती विभागीय कार्रवाई की जाए ।

जिला फाजिल्का के गांव अभुन की 44 एकड़ पंचायती जमीन का मामला पिछले लंबे समय से सुलझता नजर नहीं आ रहा जिसकी जिला पंचायत अफसर द्वारा रखी गई बोली आज पांचवीं बार रद्द कर दी गई है जिसको लेकर गांव वासियों में रोष पाया जा रहा है की जिला पंचायत अफसर  द्वारा उन्हें राजनीतिक रंजिश के चलते मौजूदा सरपंच के साथ मिलीभगत कर हर बार परेशान किया जाता है ।

जहां गांव वासियों ने आरोप लगाए हैं कि गांव की 44 एकड़ पंचायती जमीन जो कि मौजूदा सरपंच द्वारा गुप्त तरीके से बोली करवाने के बिना अपने लोगों को 24 लाख वाली जमीन 11 लाख में ठेके पर दे दी गई है जिसको पंचायती विभाग द्वारा कैंसिल कर नई बोली करवाने के लिए उन्हें हर बार बोली के लिए बुलाया जाता है लेकिन आज पांचवीं बार भी फोर्स ना होने का बहाना लगाकर बोली को रद्द कर दिया गया है उन्होंने कहा कि आज गांव के 45 व्यक्तियों द्वारा बोली दी जानी थी जो के अपने साथ सिक्योरिटी  लेकर आए थे जिन्हे बहाना बनाकर आज फिर खाली मोड़ दिया गया  उन्होंने  बी डी ओ पर आरोप लगाते हुए कहा कि  बी डी ओ द्वारा गांव के सरपंच शेरबाज सिंह के साथ मिलीभगत कर जानबूझकर उन्हें हर बार खराब किया जाता है उन्होंने मांग करते हुए कहा कि उनके गांव की पंचायत की जमीन की बोली सही तरीके से करवाई जाए ।

वहीं इस मौके पहले बोली देकर जमीन ठेके पर लेने वाले गांव के नाथूराम ने बताया कि उन्हें राजनीतिक रंजिश के कारण हर बार परेशान किया जा रहा है उन्होंने मांग करते हुए कहा कि उन्हें बार-बार बोली के नाम पर परेशान ना किया जाए ।

वह इस मौके  बी डी ओ परमजीत सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि पहले हुई बोली को रद्द करवा कर नई बोली करवाई जानी थी लेकिन फोर्स ना मिलने के कारण उन्हें लड़ाई झगड़ा होने का खतरा था इसलिए बोली को दोनों पक्षों की सहमति से रद्द किया गया है जिसे जल्द ही डी डी पी ओ की मौजूदगी में करवाया जाएगा । 

वहीं अगर देखा जाए तो धान की फसल मंडियों में जल्द ही आने भी शुरू हो जाएगी लेकिन पंचायती विभाग द्वारा जमीन की बोली अभी तक नहीं करवाई गई जिससे किसानों और गांव निवासियों का तो नुकसान हुआ है दूसरी तरफ सरकार को भी लाखों रुपए का नुकसान हुआ है और इस जमीन उगाऐ जाने वाले देश के अनाज की पैदावार का भी नुकसान हुआ है तो ऐसे में सरकार को चाहिए कि जमीन की बोली ना करवाकर सरकार के लाखों रूपये के रेवेन्यू का नुक्सान करने वाले लापरवाह अधिकारी पर बनती विभागीय कार्रवाई की जाए ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *