August 4, 2021

Aone Punjabi

Nidar, Nipakh, Nawi Soch

एथेलेटिक्स कोच निकोलई स्नेसारेव का पटिआला एन आई एस में हुआ देहांत

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पोस्टमार्टम के लिए शव को भेजा गया सरकारी अस्पताल

रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा मृत्यु का कारण

भारत के मध्यम और लंबी दूरी (दौड़) के कोच निकोलई स्नेसारेव (Nikolai Snesarev) राष्ट्रीय खेल संस्थान (एनआईएस) में अपने होस्टल के कमरे में मृत पाए गए। भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) ने इसकी जानकारी दी। बेलारूस के 72 वर्षीय स्नेसारेव के मृत शरीर को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल में भेजा गया है । वह दो साल के अंतराल के बाद सितंबर के अंत तक इस पद के लिए भारत लौटे थे।

एएफआई के अध्यक्ष आदिले सुमरिवाला ने पीटीआई से कहा कि वह इंडियन ग्रां प्री 3 के लिए (बेंगलुरू से) एनआईएस आए थे, लेकिन जब वह प्रतियोगिता के लिए नहीं पहुंचे तो शाम को कोचों ने उनके बारे में पूछा और फिर उनका कमरा अंदर से बंद पाया गया। 

उन्होंने कहा कि जब दरवाजा तोड़ा गया तो वह अपने बिस्तर पर पड़े थे। एनआईएस में भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित किया और साइ (SAI) की टीम ने उनका मृत शरीर पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेज दिया।

सुमरिवाला ने कहा कि हम उनकी मृत्यु का कारण नहीं जानते हैं । पोस्टमार्टम के बाद ही इसका पता चल पाएगा। स्नेसारेव 3000 मीटर स्टीपलचेज एथलीट अविनाश साबले (ओलिंपिक के लिए क्वालीफाई कर चुके) और अन्य मध्य एवं लंबी दूरी के धावकों को टोक्यो ओलिंपिक के लिए क्‍वालिफाई करने की मुहिम के लिये कोचिंग दे रहे थे।

2019  में जब साबले ने उन्हें छोड़कर सेना कोच अमरीश कुमार के तहत ट्रेनिंग लेने का फैसला लिया था तब उनहोने इस्तीफ़ा दे दिया था। 

उसका कॉन्ट्रैक्ट तब ओलंपिक के अंत तक था, जिसे COVID-19 महामारी के कारण एक वर्ष के लिए स्थगित कर दिया गया था।

निकोलई पहलीबार भारत 2005  में आए थे। उन्होंने 10,000 m रनर्स प्रीजा श्रीधरन और कविता राउत की ट्रेनिंग का चार्ज लिया था। उन्होंने दोनों को  2010 एशियाई गेम्स में गाइड किया और उस समय 25-लैप रेस में भारतीय महिला पहली बार मैडल जीतीं थीं। 2010  एशियाई गेम्स में गोल्ड जीतने वाली सुधा सिंह ने भी इनके अंडर ही ट्रेनिंग ली थी।

उन्होंने ललिता बाबर को स्टीपलचेज़ में आने के लिए सुझाव दिया और उनकी म्हणत का धन्यवाद है की 1984 में पि टी उषा के बाद बाबर पहली भारतीय एथलीट बनी जो 2016 में हुए रिओ ओलिंपिक गेम्स के ट्रैक इवेंट फाइनल में पहुंची। 

सुमरिवाला ने बतायाकि स्टीपलचेजर अविनाश सेबल को ट्रैन  करने के लिए उन्होंने हामी भर दी थी थी और वो दो दिन पहले ही भारत लौटे थे।  2  मार्च को बेंगलोरे में लैंड हुए और अगले दिन पटिआला आ गए थे। 

उन्होंने बताया कि निकोलई एक बहुत ही हार्ड-टास्क मास्टर थे।, उन्होंने अपने एथलीटों के लिए खुद कि ट्रेनिंग रूटीन बनाई थी। अंतराष्ट्रीय स्तर पर उनको काफी सम्मान मिला है और ये हमारा सौभाग्य है कि उन्होंने भारत के साथ एक अच्छा रिश्ता निभाया। 

निकोलई ने सभी प्रकार के ड्रग्स पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया और सुमरिवाला ने इस बात की सराहना की।उनकी एक खासियत ये भी है कि उन्होंने अपने एथेलीटों की स्पीड बढ़ने और उनको फिट रखने के लिए बहुत प्रयास किये।  कोई भी एथलीट उनके साथ ट्रेनिंग के दौरान कभी कोई दवाई नहीं लेता था और वे भी सभी प्रकार की स्वाइयों से उन्हें दूर रखते थे। 

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