May 11, 2021

Aone Punjabi

Nidar, Nipakh, Nawi Soch

हशियारपुर की रहने वाली प्रतिष्टा ने आज अपना ही नही अपने परिवार व हशियारपुर का नाम रोशन किया..

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हशियारपुर की रहने वाली प्रतिष्टा  ने आज अपना ही नही अपने परिवार व हशियारपुर का नाम रोशन किया है क्यू की प्रतिष्टा  देश की पहली ऐसी लड़की है जो वीलचैयर पर होने के बाद भी आज दुनिया की सब से बड़ी यूनिवर्सटी ऑक्सपोर्ट में पड़ने जा रही है जिससे प्रतिष्टा के परिवार को मान है उनकी बेटी के हौसले इतने बुलंद है वही प्रतिष्टा  का भी मानना है अगर उनका एक्सीडेंट न हुआ होता वे शायद यह मुकाम हासिल न कर पाती ।

हौसले व सपने इंसान को उसकी मंजिल तक ले ही जाते है मगर मन मे कुछ कर गुजरने की तमन्ना होनी चाहिए । उन लोगो के लिए एक नई मिसाल बनकर सामने आई है ज़िला हशियारपुर की प्रतिष्टा जिसकी एक सड़क दुर्घटना में चलने की क्षमता नही रही जिसके बाद डॉ ने भी ज़िंदगी भर ना चल पाने का हवाला देकर घर मे रहने को कहा । मिली जानकारी मुताबिक 13 साल की आयु में साल 2011 में एक सड़क दुर्घटना में प्रतिष्टा द्वेशवर की रीड की हड्डी में चोट लगने के कारण उसे  बिस्तर पकड़ना पड़ा  जब कि प्रतिष्टा द्वेशवर ने अपनी +2 तक कि पढ़ाई  हशियारपुर में  पूरी की उसके बाद दिल्ली के लेडी श्री राम कॉलिज में पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन पूरी की और अब अपनी मेहनत के बल पर  प्रतिष्टा  द्वेशवर को दुनिया की सब से बड़ी यूनिवर्सटी ऑक्सपोर्ट में अपनी पढ़ाई करने का मौका मिला , यहां जिक्रयोग है कि प्रतिष्टा द्वेशवर देश की पहली लड़कीं है जो वीलचेयर पर   पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री करने इंग्लैंड जाएगी , प्रतिष्टा द्वेशवर इससे पहले भी बहुत से  देशों में अपने भाषण दे चुकी है  यहां प्रतिष्टा  द्वेशवर ने भारत के अपंग लोगो पर एक रिपोर्ट पेश की थी , प्रतिष्टा मुताबिक उसकी मेहनत रंग लाई है उसने बचपन से ही किसी बड़ी यूनिवर्सटी से पढ़ाई करने का मन बनाया था जो एक्सीडेंट के बाद टूटता दिखाई दिया लेकिन उसने हिम्मत नही हारी और लगातार मेहनत करती गयी जिसका नतीजा आज वे अपना सपना पूरा करने जा रही है , प्रतिष्टा मुताबिक  इंसान को बड़ा सपना देखना चाहिए जिसे पाने के लिए वे खुद ब खुद मेहनत करता है । उसके मुताबिक उसे शुरुवाती दौर में बड़ी परेशानी झेलनी पड़ी लेकिन अपने हक ले लिए लड़ने में कोई बुराई नही मैने भी वैसा ही किया , प्रतिष्टा द्वेशवर मुताबिक आज वे जिस मुकाम पर है वे शायद उसे हासिल न कर पाती अगर उसके साथ एक्सीडेंट वाली घटना ना हुई होती , अन्यथा वे भी अन्य लड़कियों के तरह अपना समय बतीत कर रही होती , आज भी उसकी एक तमन्ना है कि वे विदेश से अपनी पढ़ाई  खत्म करने उपरांत सिवल सर्विस की परीक्षा देना चाहती है ताकि अन्य लोगो की सेवा कर सके ।

पिता बतौर डी एस पी की ड्यूटी निभा रहे है जब कि माँ हाउस वाइफ है इस मौके प्रतिष्टा द्वेशवर की माता का कहना है कि उन्हें खुशी है कि उनकी बेटी ने उनका नाम रोशन किया है जब कि शुरुवाती समय मे उन्हें भी लगा था कि कैसे उनकी बेटी आगे बढ़ पाएगी लेकिन आज उन्हें फक्र है कि उनकी बेटी ने जो मुकाम हासिल किया है जिसमें अधिक योगदान खुद प्रतिष्टा द्वेशवर का है ।

ऐसे समय मे यहां बड़े से बड़े तन्दरुस्त कुछ करने की हिम्मत नही जुटा पाते ऐसे में प्रतिष्टा द्वेशवर ने यह मुकाम हासिल कर  एक मिसाल बनकर सामने आई है ऐसी हिम्मत देख कर अन्य के लिए प्रेरणा स्रोत है 

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